कृष्ण जन्माष्टमी / Krishna Janmashtami
भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व — आधी रात को कृष्ण का जन्म मनाया जाता है।
महत्व
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। भक्त व्रत रखते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और रात 12 बजे कृष्ण जन्म का उत्सव मनाते हैं।
पूजा विधि
- 1दिन भर व्रत (फलाहार) रखें और घर/मंदिर को सजाए।
- 2रात 12 बजे लड्डू गोपाल का अभिषेक करके झूला झुलाए।
- 3भजन-कीर्तन करें और पंजीरी/माखन-मिश्री का भोग लगाए।
- 4अगले दिन व्रत का पारण करें।
Aksar Pooche Jaane Wale Sawal
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 कब है?
कृष्ण जन्माष्टमी 4 September 2026 को है।
कृष्ण जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त क्या है?
पूजा का मुख्य समय निशीथ काल (मध्य-रात्रि, लगभग 12 बजे) है।
कृष्ण जन्माष्टमी कैसे मनाया जाता है?
दिन भर व्रत (फलाहार) रखें और घर/मंदिर को सजाए। रात 12 बजे लड्डू गोपाल का अभिषेक करके झूला झुलाए। भजन-कीर्तन करें और पंजीरी/माखन-मिश्री का भोग लगाए। अगले दिन व्रत का पारण करें।
कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व क्या है?
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। भक्त व्रत रखते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और रात 12 बजे कृष्ण जन्म का उत्सव मनाते हैं।
तिथियाँ हिंदू पंचांग से सत्यापित। संपादन: भारतबोल संपादकीय डेस्क.