जगन्नाथ रथ यात्रा / Jagannath Rath Yatra
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा — पुरी (ओडिशा) में लाखों श्रद्धालु रथ खींचते हैं।
शुभ मुहूर्त
रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को सुबह शुरू होती है; पुरी का मुख्य आयोजन दिन भर चलता है। रथ की रस्सी खींचना सबसे शुभ माना जाता है।
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आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को पुरी में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा तीन अलग रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) जाते हैं। जगन्नाथ का रथ 'नंदीघोष', बलभद्र का 'तालध्वज' और सुभद्रा का 'दर्पदलन' कहलाता है। यह एकमात्र अवसर है जब भगवान मंदिर से बाहर आते हैं और हर जाति-धर्म के भक्त उनके दर्शन कर सकते हैं — इसलिए इसे समानता और भक्ति का महापर्व माना जाता है। 9 दिन बाद भगवान की वापसी यात्रा को 'बहुदा यात्रा' कहते हैं। रथ की रस्सी खींचने से मोक्ष और पुण्य की प्राप्ति मानी जाती है।
पूजा विधि
- 1सुबह जगन्नाथ जी की मंगला आरती और दर्शन करें।
- 2'छेरा पहँरा' (रथ की सफाई की रस्म) के बाद तीन रथों की पूजा होती है।
- 3नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन रथों की रस्सी खींचकर यात्रा में शामिल हों।
- 4भगवान को पोड़ा पिठा और भोग अर्पित करके प्रसाद ग्रहण करें।
- 59 दिन बाद बहुदा यात्रा (वापसी) के भी दर्शन करें।
Aksar Pooche Jaane Wale Sawal
जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 कब है?
जगन्नाथ रथ यात्रा 16 July 2026 को है।
जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभ मुहूर्त क्या है?
रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को सुबह शुरू होती है; पुरी का मुख्य आयोजन दिन भर चलता है। रथ की रस्सी खींचना सबसे शुभ माना जाता है।
जगन्नाथ रथ यात्रा कैसे मनाया जाता है?
सुबह जगन्नाथ जी की मंगला आरती और दर्शन करें। 'छेरा पहँरा' (रथ की सफाई की रस्म) के बाद तीन रथों की पूजा होती है। नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन रथों की रस्सी खींचकर यात्रा में शामिल हों। भगवान को पोड़ा पिठा और भोग अर्पित करके प्रसाद ग्रहण करें। 9 दिन बाद बहुदा यात्रा (वापसी) के भी दर्शन करें।
जगन्नाथ रथ यात्रा का महत्व क्या है?
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को पुरी में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा तीन अलग रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) जाते हैं। जगन्नाथ का रथ 'नंदीघोष', बलभद्र का 'तालध्वज' और सुभद्रा का 'दर्पदलन' कहलाता है। यह एकमात्र अवसर है जब भगवान मंदिर से बाहर आते हैं और हर जाति-धर्म के भक्त उनके दर्शन कर सकते हैं — इसलिए इसे समानता और भक्ति का महापर्व माना जाता है। 9 दिन बाद भगवान की वापसी यात्रा को 'बहुदा यात्रा' कहते हैं। रथ की रस्सी खींचने से मोक्ष और पुण्य की प्राप्ति मानी जाती है।
तिथियाँ हिंदू पंचांग से सत्यापित। संपादन: भारतबोल संपादकीय डेस्क.