गुरु पूर्णिमा / Guru Purnima
अपने गुरु और महर्षि वेद व्यास को समर्पित पर्व — ज्ञान देने वाले गुरु के प्रति कृतज्ञता का दिन।
शुभ मुहूर्त
पूजा प्रातःकाल (सुबह) के शुभ मुहूर्त में करें; पूर्णिमा तिथि दिन भर रहती है, इसलिए पूरा दिन शुभ है।
आज का पंचांग देखें →महत्व
आषाढ़ मास की पूर्णिमा को महाभारत और 18 पुराणों के रचयिता महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था, इसलिए इसे 'व्यास पूर्णिमा' भी कहते हैं। भारतीय परंपरा में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान माना गया है — इसलिए इस दिन शिष्य अपने गुरु, शिक्षक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक की पूजा करके आशीर्वाद लेते हैं। बौद्ध धर्म में भी यह दिन विशेष है: भगवान बुद्ध ने इस दिन सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था। किसान इसे वर्षा-ऋतु और चातुर्मास की शुरुआत के रूप में भी मनाते हैं।
पूजा विधि
- 1सुबह स्नान करके साफ़ वस्त्र धारण करें।
- 2अपने गुरु या उनके चित्र/चरण-पादुका की पुष्प, फल और वस्त्र से पूजा करें।
- 3गुरु को दक्षिणा अर्पित करके आशीर्वाद लें।
- 4वेद व्यास और अपने इष्ट-गुरु का स्मरण करके गुरु-स्तोत्र का पाठ करें।
- 5सात्विक भोजन और यथा-शक्ति दान करें।
Aksar Pooche Jaane Wale Sawal
गुरु पूर्णिमा 2026 कब है?
गुरु पूर्णिमा 29 July 2026 को है।
गुरु पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त क्या है?
पूजा प्रातःकाल (सुबह) के शुभ मुहूर्त में करें; पूर्णिमा तिथि दिन भर रहती है, इसलिए पूरा दिन शुभ है।
गुरु पूर्णिमा कैसे मनाया जाता है?
सुबह स्नान करके साफ़ वस्त्र धारण करें। अपने गुरु या उनके चित्र/चरण-पादुका की पुष्प, फल और वस्त्र से पूजा करें। गुरु को दक्षिणा अर्पित करके आशीर्वाद लें। वेद व्यास और अपने इष्ट-गुरु का स्मरण करके गुरु-स्तोत्र का पाठ करें। सात्विक भोजन और यथा-शक्ति दान करें।
गुरु पूर्णिमा का महत्व क्या है?
आषाढ़ मास की पूर्णिमा को महाभारत और 18 पुराणों के रचयिता महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था, इसलिए इसे 'व्यास पूर्णिमा' भी कहते हैं। भारतीय परंपरा में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान माना गया है — इसलिए इस दिन शिष्य अपने गुरु, शिक्षक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक की पूजा करके आशीर्वाद लेते हैं। बौद्ध धर्म में भी यह दिन विशेष है: भगवान बुद्ध ने इस दिन सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था। किसान इसे वर्षा-ऋतु और चातुर्मास की शुरुआत के रूप में भी मनाते हैं।
तिथियाँ हिंदू पंचांग से सत्यापित। संपादन: भारतबोल संपादकीय डेस्क.