छठ पूजा / Chhath Puja
सूर्य देव और छठी मैया की कठिन व्रत-पूजा — डूबते और उगते सूरज को अर्घ्य।
शुभ मुहूर्त
अर्घ्य का समय संध्या (सूर्यास्त) और उषा (सूर्योदय) — स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त के हिसाब से।
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कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाने वाला छठ, सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। 4 दिन का यह निर्जला व्रत आस्था और स्वच्छता का प्रतीक है — व्रती नदी/तालाब में खड़े होकर सूरज को अर्घ्य देते हैं।
पूजा विधि
- 1पहला दिन: नहाय-खाय। दूसरा दिन: खरना (खीर-रोटी का प्रसाद)।
- 2तीसरा दिन: शाम को डूबते सूरज को अर्घ्य (संध्या अर्घ्य)।
- 3चौथा दिन: उगते सूरज को अर्घ्य (उषा अर्घ्य) के साथ व्रत का पारण।
Aksar Pooche Jaane Wale Sawal
छठ पूजा 2026 कब है?
छठ पूजा 14 November 2026 को है।
छठ पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
अर्घ्य का समय संध्या (सूर्यास्त) और उषा (सूर्योदय) — स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त के हिसाब से।
छठ पूजा कैसे मनाया जाता है?
पहला दिन: नहाय-खाय। दूसरा दिन: खरना (खीर-रोटी का प्रसाद)। तीसरा दिन: शाम को डूबते सूरज को अर्घ्य (संध्या अर्घ्य)। चौथा दिन: उगते सूरज को अर्घ्य (उषा अर्घ्य) के साथ व्रत का पारण।
छठ पूजा का महत्व क्या है?
कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाने वाला छठ, सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। 4 दिन का यह निर्जला व्रत आस्था और स्वच्छता का प्रतीक है — व्रती नदी/तालाब में खड़े होकर सूरज को अर्घ्य देते हैं।
तिथियाँ हिंदू पंचांग से सत्यापित। संपादन: भारतबोल संपादकीय डेस्क.